Chanakya Neeti Hindi - Chanakya Neeti आचार्य Chanakya की नीतियों का अद्भुत संग्रह है, जो आज भी Utana Hee प्रासंगिक है। जितना वह 2 हजार चार सौ साल पहले था जब Ise Likha गया था। आचार्य Chanakya एक ऐसी महान विभूति थे जिन्होंने अपनी विद्वत्ता बुद्धिमता और क्षमता के Bal Par भारतीय Itihaas Kee Dhaara को बदल दिया।
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| Chanakya Neeti Hindi |
Chanakya Neeti Hindi | Chanakya Neeti Quotes
Top 50+ Chanakya Neeti
- संकट में बुद्धि भी Kaam Nahi आती है।
- जो जो कार्य में कुशल हो Use Usee Kaary में लगना चाहिए। किसी भी काम में Pal भर का भी विलम्ब ना करें।
- दुर्बल के Saath Sandhi ना करें।
- किसी विशेष Prayojan Ke Liye ही शत्रु मित्र बनता है।
- संधि करने में तेज़ ही Sandhi Ka होता है।
- कच्चा पात्र Kachche Paatr से टकराकर टूट जाता है।
- संधि और एकता Hone Par Bhee सतर्क रहें।
- शत्रुओं से Apane राज्य की पूर्ण रक्षा करें।
- शिकारपर Raaja Dharm Aur अर्थों को नष्ट कर लेता है।
- भाग्य के विपरीत Hone Par Achchha कर्म भी दु: ख दायी हो जाता है।
- शत्रु की बुरी आदतों को Sunakar Kaano को सुख मिलता है।
- चोर और राजसी से Dhan Kee Raksha करनी चाहिए।
- जन्म-मृत्यु Me दुःख ही है।
- सिंह भूखा होने पर भी तिनका Nahi खाता।
- अन्न के सिवाय कोई दूसरा Dhan नहीं है।
- भूख के समान Koi दूसरा शत्रु नहीं है।
- विद्या ही निर्धन का Dhan है।
- शत्रु के गुण को भी ग्रहण Karna चाहिए।
- अपने स्थान Par Bane रहने से ही मनुष्य पूजा जाता है।
- सभी प्रकार के भय से बदनामी का भय Sabse Bada होता है।
- किसी लक्ष्य की सिद्धि Me कभी शत्रु का साथ ना करें।
- आलसी का ना वर्तमान Hota है, ना भविष्य।
- सोने के साथ Milkar चांदी भी Sone जैसी दिखाई पड़ती है अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवश्य पड़ता है।
Chanakya Neeti In Hindi
Chanakya Quotes
- आत्मविजयी सभी प्रकार की संपत्ति एकत्र Karne में समर्थ होता है।
- जहाँ लक्ष्मी धन का Nivash होता है, वहाँ सहज ही सुख-सम्पदा आ जुड़ती है।
- इन्द्रियों Par विजय का आधार विनम्रता है।
- प्रकृति का कोप सभी कोपों से Bada होता है।
- शासक को स्वयं योगय बनकर योगय प्रशासकों की Sahaayata से शासन करना चाहिए।
- सुख और दुःख में समान Roop Se सहायक होना चाहिए।
- स्वाभिमानी व्यक्ति प्रतिकूल विचारों को सम्मुख रखकर Dubaara Un Par विचार करें।
- कार्य का स्वरुप निर्धारित हो Jaane Ke Baad वह कार्य लक्ष्य बन जाता है।
- अस्थिर मन वाले की Soch स्थिर नहीं रहती।
- कार्य के मध्य Me अति विलम्ब और आलस्य उचित नहीं है।
- कार्य-सिद्धि के लिए हस्त-कौशल Ka उपयोग करना चाहिए।
- अशुभ कार्यों को नहीं Karana चाहिए।
- समय को समझने Wala कार्य सिद्ध करता है।
- समय का ज्ञान ना रखने Wale राजा का कर्म समय के द्वारा ही नष्ट हो जाता है।
- मूर्ख लोग कार्यों के मध्य कठिनाई उत्पन्न Hone पर दोष ही निकाला करते हैं।
- ऋण, शत्रु और रोग को समाप्त कर Dena चाहिए।
- वन की अग्नि चन्दन की Lakadee Ko भी जला देती ह, अर्थात दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते है।
- संकट में केवल बुद्धि ही Kaam आती है।
- जब कार्यों की अधिकता हो, तब उस कार्य को Pahale करें, जिससे अधिक फल प्राप्त होता है।
- अजीर्ण की स्थिति में Bhojan दुःख पहुंचाता है।
- जन्म-मरण Me दुःख ही है।
- धर्म को व्यावहारिक होना चाहिए। लोक चरित्र Ko समझना सर्वज्ञता Kahalaatee Hai.
- तत्वों का ज्ञान ही शास्त्र Ka प्रयोजन है।
- कर्म Karane Se ही तत्वज्ञान को समझा जा सकता है।
- धर्म से भी बड़ा व्यवहार है। आत्मा व्यवहार की साक्षी है,आत्मा To Sabhee Kee साक्षी है। कूट साक्षी नहीं होना चाहिए।
- झूठी गवाही Dene Wala नरक में जाता है।
- नीच लोगों की कृपा Par निर्भर होना व्यर्थ है।
- बुद्धिमानों के शत्रु नहीं होते। शत्रु की निंदा सभा Ke मध्य नहीं करनी चाहिए।
- क्षमाशील व्यक्ति Ka तप बढ़ता रहता है।
मैंने आपको यहाँ पर 50 से भी ज्यादा Chanakya Neeti Hindi, दिये है,अगर आपको अच्छा लगा तो,कॉमनेट जरूर से करे।

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